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परित्यक्त लड़कियों के लिए शिक्षा

शिक्षा का पूरा उद्देश्य शीशे को खिड़कियों में परिवर्तित करना है.

असीम नारी शक्ति

परित्यक्त लड़कियों के लिए शिक्षा

जागरूकता बढ़ाने के लिए


आंकड़ों के अनुसार, हर दिन जिंदा या मुर्दा तीन बालिकाओं को कचरे के डिब्बे में छोड़ दिया जाता है, यह हमारे समाज के नैतिक संहिता की कठोर वास्तविकता को चित्रित करता है| जब हमारा देश स्वतंत्र होने के अपने 67 साल मना रहा था तब, उस वक़्त, वहाँ एक महिला एम्स के सार्वजनिक शौचालय में नवजात बच्ची को छोड़ गयी.

अन्य घटनाओं के रूप में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन में रेल पटरियों पर नवजात बच्ची का खून बह रहा है, वह इतनी भाग्यशाली नहीं थी.


 

 

 

 

{ कुछ और हकीकत }

वर्ष 2013 में, बालिकाओं के परित्याग के 124 मामले दर्ज किए गए थे. ज्यादातर मामलों में बच्चों को खो दिया जाने का दावा किया जाता है, कोई भी परित्यक्त बच्चों की तलाश में आगे नही आता है. हर सुर्खियों में जो अति परित्यक्त लड़किया एक बोझ प्रणाली की शिकार हैं, प्रशासन उनके लिए बुनियादी देखभाल और सहायता प्रदान करने में अक्षम और अपर्याप्त साबित हो रही है|


 

 

 

 

{ हम क्या करें? }

असीम नारी शक्ति में हमारी पहल परिवर्तन लाके एवं जागरूकता को बढ़ावा देके ऐसी पारिस्थितिकी प्रणाली बनाने की है जहां लड़कियों को बराबर समकालीनों के रूप में अधिकार दीया जाये| इसका कार्यान्वयन जागरूकता सत्र कर, समुदायों के साथ भागीदारी कर और लड़कियों एवं बच्चों के अधिकारों की वकालत करके, उनके लिए शिक्षा और संभावनाओं से भरी दुनिया के अवसर प्रदान कर और उन्हें उज्जवल भविष्य देकर हासिल किया जा सकता है|


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